कई बार अपने लगाए पेड़ को देखकर सोचता था कि अगर यह सूखा या कोई गाय या बकरी चर गई तो हमारे प्रेम का क्या होगा अब वो पेंड बकरी या गाय के भय से भी बड़ा हो गया है और हमारा प्रेम बकरी से भी छोटा।
उस छत ने कितनी कहानियां सुनी है हमारी समग्र रूप से छतों ने कितनी कहानियां सुनी है हमारी परंतु क्या हम में से किसी ने कभी किसी छत की अकेले या समग्र की कोई कहानी सुनी है।
क्या फर्क है जाग कर उसे सोचने में और सोच कर जागने में जाग कर उसे सोचने की जगह कुछ और भी कर सकता हूं परंतु उसे सोचकर जागने के अतिरिक्त क्या कुछ और कर सकता हूं।