एक छाते में हम दोनों थे प्रेम की कसौटी पर पर दोनों भीग गए बारिश की बूंदो से मैंने सोचा सकारात्मकता से जैसे बूंदों ने हमें भिगोया हमारा प्रेम भी बूंदो से सिंचित रहेगा सदा पर क्या ऐसा बूंदो ने सोचा यह सोचा उस कम से कम छाते ने।
कई बार मेरा चश्मा मुझसे शिकायत करता है कि मैं उसके माध्यम से बाहर देख लेता हूं पर चश्मे को अपनी आंखों के माध्यम से नहीं देखने देता अपने अंदर फिर चश्मा खुद ही चुप हो जाता यह सोच कर कि जब व्यक्ति स्वयं नहीं देखता अपने अंदर तो सुन भी कैसे पाता शिकायत चश्मे की।
हरे पेड़ इंतजार कर रहे हैं आपका
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