एक छाते में हम दोनों थे प्रेम की कसौटी पर पर दोनों भीग गए बारिश की बूंदो से मैंने सोचा सकारात्मकता से जैसे बूंदों ने हमें भिगोया हमारा प्रेम भी बूंदो से सिंचित रहेगा सदा पर क्या ऐसा बूंदो ने सोचा यह सोचा उस कम से कम छाते ने।
प्रत्येक बार वो भूल जाती है महत्वपूर्ण बातों को भी फिर विभेद करती है लघु कालीन स्मृति दीर्घकालीन की स्मृति में आइंस्टीन की भी लघु कालीन स्मृति नहीं थी और उसकी भी प्रत्येक बुद्धिमान की भांति दीर्घकालीन स्मृति है और मैं अपनी लघु कालीन स्मृति से मंत्रमुग्ध करता हूं लोगों को जिनका बायां मस्तिष्क कार्य ही नहीं करता उलझ जाता हूं मैं दाएं और बाएं मस्तिष्क में वह फिर से मेरी दीर्घकालीन स्मृति को चिढाती है प्रत्येक लघु काल में।
कई बार मेरा चश्मा मुझसे शिकायत करता है कि मैं उसके माध्यम से बाहर देख लेता हूं पर चश्मे को अपनी आंखों के माध्यम से नहीं देखने देता अपने अंदर फिर चश्मा खुद ही चुप हो जाता यह सोच कर कि जब व्यक्ति स्वयं नहीं देखता अपने अंदर तो सुन भी कैसे पाता शिकायत चश्मे की।
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